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Bihar Police Digital System: बिहार में FIR से चार्जशीट तक पूरी जांच प्रक्रिया होगी ऑनलाइन

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बिहार पुलिस अगले 5-6 महीनों में जांच प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल करने जा रही है। FIR, चार्जशीट, फाइनल रिपोर्ट, फिंगरप्रिंट और अपराधियों का रिकॉर्ड अब ऑनलाइन सिस्टम पर उपलब्ध होगा।

पटना/आलम की खबर:  Bihar में पुलिस व्यवस्था को हाईटेक और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। आने वाले पांच से छह महीनों में बिहार पुलिस की अनुसंधान प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट कर दी जाएगी। यानी अब प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर चार्जशीट दाखिल करने और अंतिम रिपोर्ट तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से पूरी की जाएगी। सरकार और पुलिस मुख्यालय का मानना है कि इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनेगी।

राज्य में तेजी से बढ़ते साइबर अपराध, तकनीकी अपराध और जटिल मामलों को देखते हुए बिहार पुलिस आधुनिक तकनीक को अपनाने पर विशेष जोर दे रही है। अपराध अनुसंधान विभाग यानी CID की ओर से इस दिशा में कई स्तर पर काम शुरू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल प्रणाली लागू होने के बाद मामलों की निगरानी आसान होगी और अनुसंधान की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

इस बड़े बदलाव की जानकारी Parasnath ने दी। उन्होंने बताया कि बिहार पुलिस अब पारंपरिक जांच प्रणाली से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी आधारित अनुसंधान मॉडल पर काम कर रही है। इसके तहत डिजिटल एप, ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम और केंद्रीकृत डेटा प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इससे हर स्तर पर केस की प्रगति को ट्रैक करना आसान होगा।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद थानों में दर्ज होने वाली एफआईआर सीधे ऑनलाइन सिस्टम में अपलोड की जाएंगी। इसके बाद जांच अधिकारी उसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से केस डायरी, गवाहों के बयान, साक्ष्य और चार्जशीट जैसी जानकारियां अपडेट करेंगे। इससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और रिकॉर्ड सुरक्षित रखने में भी आसानी होगी।

अधिकारियों के अनुसार बिहार पुलिस अपराधियों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस भी तैयार कर रही है। इसमें अभियुक्तों के फिंगरप्रिंट, फोटो, नाम, पता और आपराधिक इतिहास जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित रखी जाएंगी। इसका उद्देश्य अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग को अधिक सटीक और तेज बनाना है।

इसी दिशा में राज्य के 28 जिलों में 50 माप संग्रह इकाइयों यानी MCU की स्थापना की गई है। इन इकाइयों के माध्यम से अपराधियों के बायोमेट्रिक डेटा को डिजिटल रूप में संग्रहित किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इससे पुराने और नए मामलों के बीच कनेक्शन तलाशने में काफी मदद मिलेगी।

इस परियोजना को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए C-DAC की मदद ली जा रही है। पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को नई डिजिटल प्रणाली के उपयोग के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। हाल ही में गया, बेगूसराय, दरभंगा और मुजफ्फरपुर समेत कई जिलों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां अधिकारियों को डिजिटल अनुसंधान, डेटा अपडेटिंग और ऑनलाइन रिकॉर्ड प्रबंधन की जानकारी दी गई।

बिहार पुलिस अब e-Prisons प्रणाली का भी इस्तेमाल कर रही है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अभियुक्तों के जेल रिकॉर्ड, जेल आवागमन और आपराधिक इतिहास का ऑनलाइन सत्यापन किया जा रहा है। इससे पुलिस को पुराने मामलों की जानकारी तुरंत मिल सकेगी और अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होगा।

राज्य में हर महीने बड़ी संख्या में अपराधियों के फिंगरप्रिंट NAFIS Portal पर अपलोड किए जा रहे हैं। जनवरी से मार्च 2026 के बीच 40 हजार से अधिक फिंगरप्रिंट सिस्टम में जोड़े गए हैं। यह राष्ट्रीय स्तर का केंद्रीकृत पोर्टल है, जिसकी मदद से देशभर की पुलिस एजेंसियां अपराधियों की पहचान और रिकॉर्ड मिलान कर सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल फिंगरप्रिंट सिस्टम लागू होने से अपराधियों की पहचान पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से हो सकेगी। कई बार अलग-अलग राज्यों में अपराध करने वाले लोग नाम और पता बदल लेते हैं, लेकिन बायोमेट्रिक रिकॉर्ड के जरिए उनकी पहचान आसानी से की जा सकेगी।

बिहार पुलिस की डिजिटल योजना का एक अहम हिस्सा Crime and Criminal Tracking Network and Systems यानी CCTNS भी है। वर्तमान में राज्य के 968 थाने इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। शेष थानों को भी जल्द इस प्रणाली में शामिल करने की तैयारी चल रही है। CCTNS के जरिए अपराध और अपराधियों से जुड़ी जानकारी राज्यभर में साझा की जा सकती है।

ऑनलाइन एफआईआर दर्ज होने की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था के प्रति लोगों और पुलिस दोनों का भरोसा बढ़ रहा है। इससे न सिर्फ कामकाज में तेजी आ रही है बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार बिहार पुलिस की यह पहल कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। इससे जांच प्रक्रिया में देरी कम होगी, रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और केस मॉनिटरिंग आसान होगी। साथ ही आम लोगों को भी राहत मिलेगी क्योंकि उन्हें कई प्रक्रियाओं के लिए बार-बार थाने या कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा।

हाल के वर्षों में देशभर में पुलिसिंग को तकनीकी रूप से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। बिहार पुलिस भी अब उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में यदि पूरी जांच प्रणाली सफलतापूर्वक ऑनलाइन हो जाती है तो राज्य में अपराध अनुसंधान का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।

अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल पुलिसिंग से भ्रष्टाचार और रिकॉर्ड में गड़बड़ी की संभावनाएं भी कम होंगी। हर कार्रवाई का ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे जवाबदेही तय करना आसान होगा। यही वजह है कि बिहार पुलिस इस परियोजना को अपनी सबसे महत्वपूर्ण आधुनिक पहल में से एक मान रही है।

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